RTO क्या है ? आरटीओ(RTO) Officer कैसे बनें?

आज अधिकतर लोगो का सपना होता है कि उन्हें एक अच्छी गवर्नमेंट जॉब मिल जाये और किसी भी गवर्नमेंट जॉब के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है, ऐसा ही एक पोस्ट है RTO का ।

आज हम इस पोस्ट में RTO के बारें में जानेंगे । RTO क्या है ? इसका फुल फॉर्म क्या है ? RTO ऑफिसर बनने के लिए

शैक्षिक योग्यता क्या होनी चाहिए ? इसके कार्य क्या है ? RTO ऑफिसर कैसे बने ? तो आइये जानते है RTO के बारें में ।

RTO

RTO क्या है ?

आरटीओ(RTO) एक भारतीय गवर्नमेंट ब्यूरो है जो पूरे देश में वाहनों के रजिस्ट्रेशन और ड्राइविंग लाइसेंस और बाकि डॉक्यूमेंटस जारी करता है।

RTO को RTA के नाम से भी जाना जाता है RTA का पूरा नाम Regional Transport Authority है।

RTO का full form Regional Transport office होता है इसका हिंदी में पूरा नाम क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय होता है।

भारत में मोटर परिवहन एक्ट 1988 की धारा(203) के अंतर्गत पुरे देश में एक केन्द्रीय कानून लागू है।

इसके अनुसार प्रत्येक राज्य और शहर में एक आरटीओ आफ़िस होगा जो मोटर वाहन  सम्बन्धी विभिन्न प्रावधानों के

क्रियान्वयन के दायित्वों का समुचित पालन कराने के लिए जबाबदेह होता है ।

आरटीओ(RTO) ऑफिसर कैसे बनें ?  

आरटीओ(RTO) ऑफिसर पद के लिए सीधा चयन नहीं किया जाता है इसके लिए आपको सबसे पहले ARTO या IMV (Inspector Motor Vehicle) के पद पर चयन किया जाता है ।

इसके उपरांत कुछ वर्षो के बाद प्रोन्नति के द्वारा आरटीओ  ऑफिसर के पद पर तैनाती होती है ।

RTO ऑफिसर बनने की क्या-क्या योग्यताए होनी चाहिए?

शैक्षिक योग्यता-

आरटीओ(RTO) फिसर बनने के लिए आवेदनकर्ता को कम से कम 10th पास होना चाहिए।

यदि इसमें आपको उच्च पद पर नियुक्ति पानी है तो आपको किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में स्नातक होना आवश्यक होता है।

 आयु सम्बंधित योग्यता-

आरटीओ(RTO) ऑफिसर बनने के लिए आयु सीमा 21 से 30 वर्ष होती है इसके अलावा कुछ विशेष वर्ग को आयु सम्बंधित छुट प्रदान की जाती है।

OBC के अभ्यर्थियो को आयु सीमा में 3 वर्ष और SC/ST के अभ्यर्थियो को 5 वर्ष की छूट प्रदान की जाती है।

ARTO या IMV के चयन की प्रक्रिया-

RTO प्रक्रिया तीन चरणों पर आधारित है –

  1. लिखित परीक्षा
  2. शारीरिक परीक्षण
  3. साक्षत्कार
  4. चिकित्सीय परीक्षण

लिखित परीक्षा-

लिखित परीक्षा में सभी प्रश्न वस्तुनिष्ठ प्रकार के पूछे जाते है, यह परीक्षा 2 घंटे की होती है जिसमें कुल 200 प्रश्न होते है।

शारीरिक परीक्षण-

लिखित परीक्षा में उतीर्ण होने के पश्चात आपको शारीरिक परीक्षण से गुजरना पड़ता है ।

जिसमें अभ्यथियों को निर्धारित आवश्यक शारीरिक मानदंड को पूरा करना पड़ता है जिसमे शारीरिक लम्बाई, वजन और दौड़ आदि का मापन किया जाता है।

इसमें पुरुष और महिला अभ्यथियों के अलग-अलग शारीरिक मानदंड होते है।

साक्षत्कार-

साक्षात्कार में व्यक्ति के व्यक्तित्व, मानसिक और संवेगात्मक पहलुओ पर विचार किया जाता है और देखा जाता है कि

जिस पद के उक्त व्यक्ति का चयन किया जा रहा उसके लिए वह व्यक्ति योग्य है या नहीं उसी की जाँच की जाती है।

और साक्षात्कारकर्ताओ द्वारा इसी से सम्बंधित प्रश्न पूछे जाते है।

चिकित्सीय परीक्षण-  

आरटीओ (RTO) ऑफिसर बनने में आपका चिकित्सीय परीक्षण भी किया जाता है।

इसमें आँखों की जाँच, घुटने व् पैर की जाँच, सीने की जाँच, शरीर की हड्डीयों की जाँच की जाती है जो निश्चित मानक के अनुरूप होनी चाहिए।

इसी के आधार पर प्रतियोगियों को सफल या असफल घोषित किया जाता है।

आरटीओ ऑफिसर परीक्षा का सिलेबस-

प्रारंभिक परीक्षा-

इसकी  प्रारम्भिक परीक्षा वस्तुनिष्ठ होती है जो 150 अंकों की 1/3 negative मार्किंग के साथ होती है।

इसमें सामान्य ज्ञान, राजकीय भाषा का ज्ञान, सामान्य अंग्रेजी, अंकगणितीय योग्यता, तर्क क्षमता और

अन्य राष्ट्रीय और अन्तराष्ट्रीय समसामयिक विषयों से सम्बंधित प्रश्न पूछे जाते है।

मुख्य परीक्षा-

RTO की मुख्य परीक्षा में इतिहास(प्रचीन,मध्य,आधुनिक), भूगोल(भारत,विश्व),भारतीय राजव्यवस्था, भारतीय अर्थव्यवस्था, भारतीय कृषि, वाणिज्य-व्यापर

राज्य-विशेष (शिक्षा, संस्कृति कृषि व्यापर-वाणिज्य जीवन शैली सामजिक रीति-रिवाज और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी इत्यादि)

पर्यावरण और पारिस्थिकी सामान्य विज्ञान और अंग्रेजी ज्ञान, अंकगणितीय योग्यता, तर्क क्षमता और अन्य

राष्ट्रीय और अन्तराष्ट्रीय समसामयिक विषयों से सम्बंधित प्रश्न पूछे जाते है।

RTO ऑफिसर की सैलरी-

आरटीओ(RTO) की मुख्य परीक्षा में ऑफिसर का पद बहुत सम्मान-जनक इसका ग्रेड पे 4200 है जिसमे वेतन 15600 से 55000 रूपये होती है यह अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग भी हो सकती है।

http://hi.wikipedia.org/wiki/क्षेत्रीय_परिवहन_कार्यालय

आरटीओ ऑफिसर के कार्य-                     

जब हम कोई नया वाहन खरीदते है तो उस वाहन के लिए कुछ आवश्यक दस्तावेज बनवाने पड़ते है जो वाहन चालक के लिए आवश्यक होते है

जैसे- ड्राइविंग लाइसेंस, व्हीकल रजिस्ट्रेशन,पॉल्यूशन टेस्ट, इंश्योरेंस पेपर इत्यादि दस्तावेज़ आरटीओ की मुख्य परीक्षा में जाँच के बाद ही जारी किये जाते है।

ड्राइविंग लाइसेंस(DL)-

यह वाहन चालक के लिए यह एक आवश्यक दस्तावेज़ है यह दस्तावेज़ RTO द्वारा जारी किया जाता है ।

DL बनवाने के लिए आपको DL परीक्षण से गुजरना पड़ता है और उत्तीर्ण होने के बाद DL जारी किया जाता है।

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DL (Driving License) बनवाने की पूरी प्रक्रिया-

व्हीकल रजिस्ट्रेशन पेपर –

वाहन खरीदने के बाद वाहन का रजिस्ट्रेशन कराना आवश्यक होता है रजिस्ट्रेशन कराने के बाद एक रजिस्ट्रेशन नंबर मिलता है।

जो वाहन के द्वारा कोई घटना होने की दशा में वाहन मालिक के नाम का पता चलता है की वाहन किसके नाम पर रजिस्टर्ड है।

 इंश्योरेंस पेपर-

इंश्योरेंस पेपर, वाहन खरीदने के बाद वाहन का बीमा किया कराया जाना आवश्यक होता है जिससे किसी दुर्घटना पर वाहन की क्षति-पूर्ति की जा सके ।

 पॉल्यूशन टेस्ट-

मोटर वाहन का निर्धारित समय पश्चात् प्रदूषण की जाँच की जाती है जिसका उद्देश्य वाहन द्वारा पर्यावरण के नुकसान स्तर का पता लगाना होता है । यदि वाहन द्वारा पर्यावरण के नुकसान स्तर बहुत अधिक पाया जाता है तो वाहन रजिस्ट्रेशन निरस्त भी किया जा सकता है।

दोस्तों आज इस पोस्ट में RTO के बारें में पूरी जानकारी दी गयी यह जानकारी पसंद आये तो अपने दोस्तों में शेयर जरुर करें ।

धन्यवाद

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