RERA (रेरा ) क्या है ? RERA Act की जानकारी हिन्दी में-

हैलो दोस्तों हमारे ब्लॉग में आपका स्वागत है, आज हम इस पोस्ट में  रेरा (RERA) के बारे में बताएंगे। RERA क्या है ? RERA का फुल फार्म क्या है ? रेरा Act के दायरे में कौन आते हैं ? रेरा कब लागू हुआ ? RERA के क्या उद्देश्य है?  रेरा act लागू करने की जरूरत क्यों पड़ी ? RERA Act के तहत ग्राहक कहाँ और कैसे शिकायत करें? शिकायत करने पर RERA क्या कार्यवाई कर सकती है ? इसके क्या फायदे हैं ? तो आइए जानते हैं रेरा (RERA) के बारे में।

RERA kya hai

रेरा (RERA) क्या है ?

RERA भारत सरकार द्वारा बनाया हुआ एक अधिनियम है जो घरेलू खरीदारों की रक्षा करने के साथ-साथ स्थावर सम्पदा (Real estate) में पूँजी निवेश को बढ़ावा देने में मदद करता है। इस तरह से RERA एक सेट ऑफ रुल्स है जो एक Real Estate Regularity Authority सेट अप करता है जो रियल एस्टेट बिजनेस को बढ़ावा देती है और इस बिजनेस में पारदर्शिता सुनिश्चित करती है।

RERA के माध्यम से जो भी Real estate के कारोबार हो रहे हैं उनको कन्ट्रोल किया जाएगा। इस RERA Act के मुताबिक नये खरीदारों, नये प्रोजेक्ट पर तो लागू होगा ही साथ ही साथ ऐसे प्रोजेक्ट पर लागू होगा जो अभी पूरे नहीं हुए हैं। अभी तक RERA Act सभी राज्यों और केन्द्र शासित राज्यों में भी लागू हो चुका है।

हर राज्य में Real estate regularity authority बनेगी और हर प्रोजेक्ट को इन ऑथोरिटी में रजिस्टर कराना होगा।तब काम शुरू होगा ।रजिस्ट्रेशन के बाद ही Developers और Builders अपने प्रोजेक्ट के बारे में विज्ञापन दे सकेंगे । प्लाट या अपार्टमेंट बेचने वाले सभी प्रापर्टी डीलर्स को ऑथोरिटी में अपना रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा।

यानि जो प्रोजेक्ट बनेगा उसकी हर जानकारी यानि प्रोमोटर का नक्शा, जमीन की स्थिति, कब तक पुरा हुआ, किस विभाग से मंजूरी मिली, किस विभाग से नहीं मिली। इन सभी चीजों की जानकारी देनी होगी ।

केन्द्र सरकार ने जो RERA Act लागू किया था उसकी मुख्य बात कुछ इस प्रकार है –

1.प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन –

किसी भी प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन जरूरी हो और इसे RERA ऑथोरिटी के पास रजिस्टर्ड कराना होगा और साथ में प्रोजेक्ट से जुड़ी सभी जानकारी देनी होगी और साथ ही प्रोजेक्ट का अलग से बैंक अकाउंट भी खुलवाना होगा।

2.धोखाधड़ी पर सजा –

अगर बिल्डर किसी खरीदार से धोखाधड़ी या वादाखिलाफी करता है तो खरीदार इसकी शिकायत Regularly Authority से कर सकता है।जिसमें 3 साल की सजा का प्रावधान भी है।

3.रियल एस्टेट एजेंट भी दायरे में –

रियल एस्टेट में काम करने वाले एजेंट्स को भी RERA में रजिस्ट्रेशन कराना होगा।

4.सरकारी प्रोजेक्ट भी दायरे में –

प्राइवेट बिल्डर या डेवलेपर्स ही नहीं हाउसिंग और कामर्शियल प्रोजेक्ट बनाने वाले TDA,GDA जैसे संगठन भी इस कानून के दायरे में आते हैं।
5.बिल्डर की जिम्मेदारी –

किसी भी प्रोजेक्ट के ढ़ांचे की जिम्मेदारी 5 साल तक बिल्डर्स की होगी।

6.प्रोजेक्ट में देरी पर लगाम –

प्रोजेक्ट के लिए जमा किए गए 70% पैसों को प्रोजेक्ट के बैंक अकाउंट में जमा कराना होगा।ये पैसा केवल उसी प्रोजेक्ट में इस्तेमाल हो पाएगा।

7.आनलाइन मिलेगी जानकारी –

बिल्डर को ऑथोरिटी की वेबसाइट पर तेज बनाने के लिए लाग-इन आईडी और पासवर्ड दिया गया है। इसके जरिये उन्हें प्रोजेक्ट से जुड़ी सभी जानकारी वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी। बिल्डर को सभी जानकारियां हर तिमाही में अपडेट करनी होगी।

8.बुकिंग राशि –

बिल्डर एडवांस या आवेदन शुल्क में 10% से ज्यादा रकम नहीं ले सकेंगे जब तक बिक्री के लिए रजिस्टर्ड एग्रीमेंट न हो जाए।

9.देरी से डिलीवरी पर मुआवजा –

अगर खरीदार को समय पर पजेशन नहीं मिलता है तो खरीदार अपना पूरा पैसा ब्याज सहित वापस ले सकता है। या फिर पजेशन मिलने तक हर महीने ब्याज ले सकता है।

10.ट्रिब्यूनल का गठन –

ट्रिब्यूनल के पास किसी ग्राहक और बिल्डर के पक्ष में फैसला सुनने का अधिकार है और वह बिल्डर पर जुर्माना भी लगा सकता है।

RERA(रेरा) का फुल फार्म क्या है ?

RERA का फुल फार्म Real Estate Regulation & Development (Act ) है तथा हिन्दी में रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम है।

रेरा (RERA) कब लागू हुआ ?

बिल्डरों की मनमानी और ग्राहकों की मुश्किलों को देखते हुए काफी लम्बे समय से संसद में Real Estate Regulator Bill पेंडिंग पड़ा था।बार-बार बिल संसद की स्टैंडिंग कमेटी के पास वापस भेज दिया जाता था।

लेकिन मार्च 2016 में संसद ने Real Estate Regulator Bill को पारित किया। 9 साल के इंतजार के बाद RERA लागू हो गया। 1 मई 2017 को इस बिल को नोटिफाई कर दिया गया।

 

RERA (रेरा) Act लागू करने की जरुरत क्यों पड़ी ?

Real Estate Sector भारत के अंदर काफी unregulated sector रहा है। इसमें बहुत ज्यादा खरीददारों के साथ धोखा हो जाता था। बिल्डरों पर बहुत सारे कोर्ट केसे चल रहे हैं। खरीददारों को बहुत नुकसान उठाना पड़ा है जैसे कि उनको लोन की EMI भरनी पड़ती है और साथ ही में किराया भी देना पड़ता है।
पैसा देने के बाद भी 6-7 साल तक उनको घर नहीं मिला है और साथ ही में कोर्ट के अन्दर केस को साल्व होने में भी बहुत अधिक समय लग जाता है।
इन सभी को देखते हुए RERA act लागू किया गया है। जिसके हिसाब से सभी राज्यों में एक ऑथोरिटी बनानी होगी।

रेरा (RERA) Act के उद्देश्य क्या है ?

1. अचल सम्पत्ति के खरीद फरोश (buy and sale) को व्यवसायिक रूप देना और इसको पूरे भारत में एक जैसा लागू करना।

2.पारदर्शिता को बढ़ावा देना और धोखाधड़ी और देरी को कम करना।

3.आवंटियों और खरीदार की ओर जवाबदेही सुनिश्चित करना और उनके अधिकारों की रक्षा करना।

https://hi.wikipedia.org/wiki/रियल_एस्टेट_(विनियमन_और_विकास)_अधिनियम

RERA के दायरे में कौन-कौन आता है ?

केन्द्र सरकार की अधिसूचित कानून के मुताबिक उन सारे प्रोजेक्ट को RERA के तहत रजिस्टर कराना था जिन्हें 1 मई 2017 तक Completion certificate (CC) नहीं मिला था।

Occupancy certificate (OC) हासिल करने वाले प्रोजेक्ट्स और बिल्डिंग पर RERA नहीं लागू होगा। OC हासिल करने वाले प्रोजेक्ट्स को RERA रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं होगी । OC नहीं मिलने वाले अंडरकंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स RERA में आएंगे।

“Occupancy Certificate लोकल.ऑथोरिटी जारी करती है। स्थानीय नियमों के आधार पर सर्टिफिकेट जारी होता है। सर्टिफिकेट के बाद ही प्रोजेक्ट या बिल्डिंग की रजिस्ट्री होती है।“

रेगुलेटरी ऑथोरिटी का क्या रोल है ?

1.राज्यों में बनी रेगुलेटरी ऑथोरिटी पर प्रोजेक्ट को रजिस्टर और रेगुलेट करने की जिम्मेदारी होगी।

2.ये एक वेबसाइट बनाएगी जिसके जरिये लोगों को Real Estate प्रोजेक्ट से जुड़ी सभी जानकारियां मिल पाएगी।

3.सभी बिल्डर्स को रेगुलेटरी ऑथोरिटी को अपनी सारी फाइनेंशियल जानकारियां भी देनी होंगी।

4.बिल्डर्स को प्रोजेक्ट, टावर के आधार पर नम्बर जारी किए जाएंगे।

रेरा (RERA) के क्या फायदे हैं ?

1.रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ेगी।

2.बढ़ती कीमतों पर लगाम लगेगी।

3.ग्राहकों के हितों की सुरक्षा होगी।

4.RERA बिल्डरों को रेगुलेट करता है।

5.घर खरीदारों को शिकायत का अधिकार है।

6.प्रापर्टी के बारे में सही जानकारी मिलेगी।

7.वेबसाइट पर ही पूरी डिटेल मिल जाती है।

8.डेवलेपर्स की भी पूरी जानकारी मिल सकती है।

9.आनलाइन शिकायत करने का विकल्प है।

10.सही प्रोजेक्ट और समय से डिलीवरी होगी।

11.समय से पजेशन न देने पर ,खराब कंस्ट्रक्शन पर बिल्डरों को ब्याज ,जुर्माना देना होगा।

12.बिल्डर प्रोजेक्ट के बारे में झूठे विज्ञापन नहीं दे सकते।

13.बिल्डर के धोखाधड़ी का दोषी मिलने पर 3 साल की सजा है।

रेरा (RERA) के तहत ग्राहक कहाँ और कैसे शिकायत करें ?

यदि आपका प्रोजेक्ट RERA में रजिस्टर्ड है तो आप उसकी शिकायत RERA की वेबसाइट पर कर सकते हैं। हर राज्य की अलग RERA की वेबसाइट है।
शिकायत के लिए ग्राहकों को परियोजना का RERA रजिस्ट्रेशन नंबर, बिल्डर का नाम, प्रोजेक्ट का नाम और फ्लैट का नाम सम्बन्धित दस्तावेज देने होंगे।शपथ पत्र जिस पर शिकायत नम्बर लिखा हो। हर पेज पर शिकायतकर्ता के सिग्नेचर जरूरी होता है।

लेकिन अगर आपका प्रोजेक्ट RERA के अन्तर्गत नहीं आता है तो भी RERA ऑथोरिटी से आप इसकी शिकायत कर सकते हैं।लेकिन इसके लिए आपको शुल्क भी देना होगा साथ ही प्रोजेक्ट से सम्बन्धित दस्तावेज भी देने होंगे।हर राज्य में शिकायत के लिए अलग-अलग फीस हो सकती है।

यदि रेरा (RERA ) में शिकायत करने पर RERA से मदद नहीं मिल रही है तो क्या करें ?

अगर आपको RERA से मदद नहीं मिल रही है तो इसके लिए आप जिला उपभोक्ता फोरम में तथा राज्य उपभोक्ता आयोग के दफ्तर में 60 दिनों के अंदर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। (राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग का दफ्तर दिल्ली में है।) जिला फोरम के फैसले के खिलाफ राज्य उपभोक्ता आयोग और आयोग के फैसले के खिलाफ राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग( दिल्ली) में अपील की जा सकती है।

जो ग्राहक उपभोक्ता फोरम के जरिये अपनी शिकायतों को सुलझाना चाहते हैं वो केस को पहले फोरम के सामने रजिस्टर करायें। रजिस्टर होने के बाद केस की सुनवाई होती है, जिसमें दोनों पक्षों को जवाब के लिए बुलाया जाता है।

जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर केस शुरू हो जाता है।पीड़ित व्यक्ति चाहे तो अपना वकील रख सकता है।लेकिन 20 लाख तक के मामले जिला उपभोक्ता फोरम में दायर किए जा सकते हैं। 20 लाख से अधिक और 1 करोड़ तक के मामले राज्य उपभोक्ता आयोग में दायर किये जाते हैं।

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शिकायत करने पर RERA क्या कार्यवाही कर सकती है ?

अगर प्रोमोटर या बिल्डर RERA Act में प्रोवाइडेड किसी भी कन्डीशन का वायलेशन करता है या प्रोमोटर को जो गर्वनमेंट से सेंशन मिली हुई है उसमें कुछ टर्म और कंडीशन सब्सक्राइब्ड होती है।

उन किसी भी टर्म और कंडीशन का अगर वायलेशन करता है, नहीं पूरा करता है या फिर प्रोमोटर झूठे वादे करता है। तो RERA उस बिल्डर का प्रोजेक्ट कैंसिल कर सकती है।उसका रजिस्ट्रेशन कैंसिल कर सकती है।

RERA ऑथोरिटी उसको वेबसाइट एक्सेस करने से बाहर कर सकती है। उसको Specially डिफाल्टर घोषित कर सकती है और उसका नाम फोटो सहित अपने वेबसाइट पर डाल सकती है। उसके बैंक अकाउंट को जिसमें पैसा जमा किया है उसको सीज कर देगी जिससे बिल्डर्स किसी को भेज न सके।

दोस्तों  आज हम इस पोस्ट में RERA act के बारे में पूरी जानकारी देने का प्रयास किये हैं। यह पोस्ट आपको पसंद आये तो अपने दोस्तों में शेयर जरूर करें और यदि कोई सुझाव देना चाहते है तो कमेंट के माध्यम से दे सकते है,  धन्यवाद ।

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