Equity Fund और Debt Fund क्या है ? इसमें निवेश से संबंधित आवश्यक जानकारी

जब आप लोग Investment करने जाते हैं तो आप लोगों के मन में ऐसे कई बार सवाल आता होगा कि किस फंड में निवेश करें। Equity fund में निवेश करें या Debt fund में निवेश करें। यह कन्फ्यूजन हो जाता है कि Equity fund risky है और Debt fund safe है तो हमें किसमें निवेश करना चाहिए दोनों में या कोई एक में ही करना चाहिए।

आज हम इस पोस्ट में Equity fund और Debt fund के बारे में बताएंगे। तो आइये जानते हैं Equity fund और Debt fund के बारे में ।

Equity Fund क्या है ?

ऐसे Mutual funds जो निवेशकों की रकम कम्पनियों के शेयरों में लगाते हैं, उन्हें Equity Mutual fund कहते हैं। Equity Mutual fund का फंड मैनेजर यह तय करता है  कि निवेशकों का पैसा किन-किन कम्पनियों के शेयरों में लगाना है।यह पता लगाने के लिए एक Research Team होती है, जो फंड मैनेजर को सलाह देती है।

Equity fund में निवेश का अधिकतर हिस्सा शेयर बाजारों में निवेश के

Equity Fund

लिए उपयोग किया जाता है।यह Mutual funds उन निवेशकों के लिए हो सकता है जो कि शेयर बाजार में जोखिम उठाने के लिए तैयार रहते हैं।क्योंकि अगर इक्विटी फंड में ज्यादा मुनाफा है तो इसके साथ ही जोखिम भी उतना ज्यादा होता है। Equity fund के माध्यम से Secondary Market में इक्विटी से सम्बन्धित चीजों में निवेश किया जाता है।

Debt Fund क्या है ?

डेब्ट फण्ड  एक ऐसा Mutual fund स्कीम है  जो निश्चित आय उपकरणों में निवेश  करता  है,  जैसे  Corporate और Government bond, Debt Securities और मुद्रा बाजार आदि जो पूंजी में मूल वृद्धि प्रस्तावित करते हैं। Debt fund इनकम या आय फंड, और बांड फंड के नाम से भी जाने जाते हैं।

debt fund kya hai

ये उन निवेशकों के लिए हैं जो नियमित आय का लक्ष्य लेकर चलते हैं और जोखिम नहीं उठाना चाहते और जो पूंजी की सुरक्षा चाहते हैं और छोटी अवधि के लिए धन को रखना चाहते हैं। Debt fund कम अस्थिर होते हैं।

Debt Mutual Funds में निवेशक की पूंजी को फंड मैनेजर द्वारा Fixed Debt Scheme में निवेश किया जाता है।इस का शेयर बाजार के उतार-चढा़व से सीधा संबंध नहीं होता है, हालांकि बैंकों के ब्याज दरों में होने वाले परिवर्तन का असर निवेशक के निवेश पर Capital Appreciation या Capital Depreciation के रूप में अवश्य पड़ता है।

Equity  fund में निवेश क्यों करना चाहिए ?

  1. Equity योजनाएं लिक्विड होती है, यानि आप किसी भी समय अपनी राशि निकाल सकते हैं।
  2. बाजार में गिरावट के दौरान सस्ती NAV (Net Asset Value) पर इकाइयां खरीदने के लिए Equity Mutual fund योजनाओं में अधिक निवेश करने की छुट मिलती है।
  3. Equity Mutual funds योजनाओं में आपको SIP के जरिये नियमित समय पर छोटी रकम का निवेश करने की सुविधा भी मिलती है।
  4. यदि Equity Mutual Fund Scheme में निवेश की अवधि एक वर्ष से अधिक है, तो पूंजीगत लाभ को Tax Liability से छुट मिल जाती है।
  5. Equity में आप के पैसे का निवेश करने के लिए अनुभवी और विशेषज्ञ पेशेवरों को नियुक्त करती है। फंड मैनेजर उन कम्पनियों के बारे में अच्छी तरह रिसर्च करते हैं, जिनमें वे आपका पैसा निवेश करते हैं। ऐसे में आपकी निवेश पूंजी के लिए जोखिम बेहद कम हो जाता है।
  6. जिन निवेशक की लम्बे समय में अपनी पूंजी बढ़ाने की योजना वे लोग Equity Mutual Fund में निवेशक करते हैं ।

Debt Fund में निवेश क्यों और किसे करना चाहिए ?

Debt Fund  , Fixed Deposit का अच्छा विकल्प है। Debt Fund ,Fixed Deposit की रेंज में ही ब्याज देते हैं, लेकिन ये Fixed Deposit से ज्यादा टैक्स में छुट प्रदान करते हैं। Fixed Deposit से जो आय होती है

वो आपकी इनकम में जुड़ जाती है और उस स्लैब के अनुसार टैक्स देना पड़ता है। Debt Fund के Short Term लाभ भी टैक्स योग्य आय में जुड़ती है।

लेकिन जब समयावधि 3 वर्ष से ज्यादा होती है तो टैक्स में ज्यादा मिलता है। Fixed Deposit में पूंजी लाक हो जाती है, वहीं पर Debt Fund में कभी भी राशि निकाली जा सकती है।

जहाँ Equity Fund Public Listed Companies में निवेश करते हैं, वहीं Debt Fund सरकारी और कम्पनियों की Fix-Income Securities में निवेश करते हैं।

इनमें कार्पोरेट बांड, सरकारी सिक्योरिटीज , ट्रेजरीबिल, मनी मार्केट Instrument और अन्य कई प्रकार की Debt Securities शामिल हैं।

शेयर की तरह किसी कम्पनी की इक्विटी मे निवेश करना उस कम्पनी की ग्रोथ के लिए हिस्सेदारी को खरीदना है, लेकिन जब आप Debt Fund खरीदते हैं,

तो आप जारी करने वाली संस्था को लोन देते हैं। सरकारी और प्राइवेट कम्पनियां अपने विभिन्न कार्यक्रमों को चलाने के लिए लोन पाने के लिए बिल और बांड जारी करती है।

इक्विटी फंड की तरह Debt Fund में भी अलग-अलग सिक्योरिटीज में निवेश करके अच्छा मुनाफा बढ़ाया जाता है, लेकिन इनमें रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती है। Debt fund ऐसे निवेशकों के लिए  उपयुक्त हैं

जो ज्यादा लाभ चाहते हैं। इसमें रिटर्न या लाभ भी अच्छा होता है, लेकिन इक्विटी फंड से कम होता है । आप 3-4 साल के लिए निवेश के लिए Debt fund को चुन सकते हैं।

निवेशक fixed deposit के लिए एक वैकल्पिक निवेश की तलाश करते हैं।

लेकिन ज्यादा लिक्विडिटी के साथ डेट फंड का विकल्प चुन सकते हैं। Debt fund में कोई लाक इन अवधि नहीं होती है।

यदि आप स्थिर रिटर्न कमाना चाहते हैं, तो आप निवेश के लिए Debt fund पर विचार कर सकते हैं।

Equity fund कितने तरह का होता है ?

1. Large Cap Equity funds – 

लार्ज कैप फंड ज्यादातर बड़ी कम्पनियों में निवेश करते हैं। फंड इन कम्पनियों को उनके बाजार के पूंजीकरण के आकार के अनुसार निवेश करते हैं।

इन कम्पनियों को  निवेश के लिए अच्छा माना जाता है, क्योंकि वे अपने उद्योग क्षेत्र में अच्छी तरह से स्थापित कम्पनियां होती है और एक तरह से टाप कम्पनियों की ही लार्ज कैप में होने की सम्भावना होती है।

ये फंड अपेक्षाकृत कम जोखिम लेते हुए रिटर्न देने की सम्भावना रखते हैं।

2. Mid Cap Equity funds –

Mid cap fund ज्यादातर मध्यम आकार की कम्पनियों में निवेश करते हैं। इन कम्पनियों में निवेश से कुछ रिस्क भी हो सकता है।

लेकिन कम्पनियां विकसित होकर बड़ी कम्पनियां बन जाती है तो निवेशकों को लाभ भी हो सकता है।

3. Small cap equity fund –

Small cap fund छोटी कम्पनियों में निवेश करते हैं। इन कम्पनियों के शेयरों में निवेश बहुत रिस्क भरा हो सकता है।

ये फंड केवल high risk उठा सकने वाले निवेशकों के लिए उपयुक्त है।

4. Diversified equity fund –

फंड मैनेजर मार्केट view के आधार पर diversified equity fund अलग-अलग आकार की बाजार पूंजीकरण वाली कम्पनियों में निवेश करते हैं। ये फंड सामान्य जोखिम बर्दाश्त कर सकने वाले निवेशकों के लिए उपयुक्त है।

5. ELSS (Equity linked saving scheme)-

यह फंड Diversified equity fund की तरह ही है, परन्तु ELSS में निवेशकों के लिए टैक्स में छुट का लाभ जुड़ा होता है।इस स्कीम के तहत निवेशकों को 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स कटौती के लिए योग्य है।

इस फंड में निवेश करने पर निवेशक 3 साल के लाक इन अवधि के बाद मिलता है।

6. Sector fund –

सेक्टर फंड ज्यादातर किसी विशेष क्षेत्र की कम्पनियों के शेयरों में निवेश करते हैं, जिसमें ग्रोथ  की सम्भावना ज्यादा हो। इसलिए सेक्टर फंड को बेहद जोखिम भरा माना जाता है।

निवेशकों को अपने निवेश में से केवल एक छोटा सा भाग ही सेक्टर फंड में निवेश करना चाहिए

7. Flexy equity fund –

इस फंड में flexibility  होने के कारण फंड मैनेजर मार्केट की स्थिति को देखते हुए लार्ज कैप, मिड कैप या स्माल कैप में से किसी में भी निवेश किया जा सकता है।

8. Multi cap equity fund –

इस फंड के जरिये फंड मैनेजर निवेश कों का पैसा अलग-अलग कम्पनियों में पहले से निर्धारित सीमा के आधार पर निवेश करते हैं।

9. Index fund –

इण्डेक्स फंड में निफ्टी के 50 शेयरों और सेंसेक्स के 30 शेयरों में निवेश किया जाता है।

Debt fund कितने तरह का होता है ?

1. Liquid fund –

इसमें 0-3 महीने के जो पेपर्स होते है उसमें निवेश करता है। सेविंग अकाउंट के सामने जो इनवेस्टमेंट होता है, वही लिक्विड फंड होता है।

2. Ultra short term fund –

इस फंड में 3-6 महीने के लिए निवेश किया जाता है। इसमें निवेश से लिक्विड फंड से थोड़ा ज्यादा रिटर्न मिलता है,

लेकिन रिस्क की सम्भावना लिक्विड फंड से ज्यादा होती है।

3. Short term fund –

इस फंड में कम जोखिम और कम रिटर्न मिलता है। यदि आप एक कम जोखिम और कम रिटर्न वाले फंड में निवेश करना चाहते हैं

तो आपको Short term फंड में निवेश करना चाहिए।

4. Gilt fund –

गवर्नमेंट सिक्योरिटीज में निवेश को गिल्ट फंड कहते हैं। ये fixed income fund होते हैं जो सरकारी सिक्योरिटीज मे निवेश करते हैं।

गिल्ट फंड में लिक्विडिटी रिस्क भी होता है। इनमें रिस्क रिटर्न का होता है।

5. Income fund –

ये फंड उन निवेशकों के लिए अधिक उपयुक्त है, जिनके निवेश का लक्ष्य 1 साल से अधिक है। यह फंड conservative investors के लिए उपयुक्त है,

जो कम जोखिम उठाना चाहते हैं। इस फंड का प्रदर्शन तब अच्छा होता है, जब कम समय में ब्याज दरें अधिक होती है।

6. Credit opportunity fund –

Credit  opportunity fund कार्पोरेट बांड में निवेश करते हैं। ये फंड AAA रेटिंग से कम वाले डिबेंचर में भी निवेश करते हैं। इस पोर्टफोलियो में सरकारी सिक्योरिटीज और ट्रेजरी बिल आदि भी होते हैं।

किसी निवेशक को अपने debt पोर्ट फोलियो का 30 फीसदी तक Credit opportunity fund में निवेश करना चाहिए।

7. Monthly income plan –

यह उन लोगों के लिए उपयुक्त है जो मासिक आधार पर नियमित और गारंटीकृत आय प्राप्त करने की उम्मीद करते हैं।

यह सुरक्षित निवेश विकल्प है। इस में गारंटीड रिटर्न मिलता है।

8. Fixed maturity plan –

Fixed maturity plan एक close ended debt mutual funds scheme होती है, जिसकी maturity की अवधि निश्चित होती है।

यह फंड ऐसे instrument  में निवेश करते हैं, जिसकी मैच्योरिटी अवधि एक समान होती है।

Debt fund कैसे चुनें ?

  • फंड का बेंचमार्क सही होना चाहिए।
  • फंड की किस्म उसके निवेश से मेल खाना चाहिए।
  • जाने माने संस्थान और कम्पनी में निवेश सुरक्षित रहता है।
  • डिबेंचर,G-Sec, बांड में निवेश पर गौर करें।
  • निवेश की क्रेडिट रेटिंग को जांचे।
  • निवेश की maturity fund का नेचर बताती है।
  • चुनिंदा एसेट में निवेश ज्यादा होता है तो रिस्क भी ज्यादा होता है।
  • फंड के कुल निवेश पर ध्यान दें।
  • एक ही सेक्टर में ज्यादा निवेश जोखिम भरा होता है।
  • ब्याज दरों का फंड पर असर होता है।

Share Market क्या है ? पूरी जानकारी हिंदी में

Equity fund और Debt fund में क्या अन्तर है ?

1. Risk –

Equity fund में रिस्क थोड़ा सा ज्यादा होता है क्योंकि आपका पैसा निश्चित रूप से शेयर्स में निवेश होता है। लेकिन ये रिस्क इतना ज्यादा high नहीं है क्योंकि high आप short term में मान सकते हैं। हो सकता है मार्केट खराब चल रही हो और पैसा जल्दी न निकाल पाएं तो short term में रिस्क high हो सकता है। लेकिन long term  में रिस्क कम हो जाता है क्योंकि आपके Mutual funds के पास बहुत सारे शेयर्स होता है।

जबकि Debt fund में रिस्क कम हो जाता है क्योंकि Debt fund मे सारा पैसा गवर्नमेंट सिक्योरिटीज में या कम्पनी के या फाइनेंशियल इन्स्टीटयूशन के लोन के रूप में जाता है तो long term और short term दोनों में रिस्क कम हो जाता है।

2. Return –

Equity fund में आप निवेश कर रहे हैं तो रिस्क वहाँ ज्यादा है तो रिटर्न की सम्भावना भी रहता है। Short term में रिटर्न कम हो सकते हैं और long term में रिटर्न ज्यादा भी हो सकते हैं क्योंकि ये मार्केट पर निर्भर करता है। इसमें 13-15% तक रिटर्न मिल सकता है।

जबकि Debt fund  में औसतन 7-8% तक का रिटर्न मिल जाता है क्योंकि यहाँ मार्केट पर निर्भर नहीं होता है चाहे कम्पनी का नुकसान हो या फायदा हो।

3. Liquidity –

इक्विटी और डेट फंड दोनों में ही आप जल्दी पैसा निकाल सकते हैं। लेकिन Equity fund में लिक्विडिटी (जितना जल्दी पैसा निकालना होता है) थोड़ी कम होती है क्योंकि आपका पोर्टफोलियो  (-10 %) चला गया हो और आप उस पैसे को न निकालना चाहे तो लिक्विडिटी कम हो जाती है।

4. Volatility (अस्थिर) –  Equity fund में उतार चढ़ाव बहुत ज्यादा होता है क्योंकि शेयर्स कभी नीचे जाते हैं कभी बहुत ऊपर जाते हैं तो Volatility काफी ज्यादा हो जाती है। जैसे कि कभी किसी साल में 50% ऊपर जा सकता है और कभी 30% नीचे भी आ सकता है। लेकिन यदि हम लम्बे समय तक इक्विटी फंड में जुड़ते हैं तो रिटर्न भी अच्छी मिल जाती है। जबकि Debt fund में उतार-चढा़व नहीं होता है तो Volatility भी कम होता है और इसमें Fixed return भी मिलता है।

आज हम इस पोस्ट में Equity fund और Debt fund के बारे में बताएं है। आपको हमारी यह पोस्ट कैसी लगी हमें कमेंट कर के बताएं और अपने दोस्तों के साथ Equity fund और Debt fund की यह जानकारी जरूर शेयर करें।

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