Cryptocurrency क्या होता है ? इसके फायदे और नुकसान क्या है ?

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इन्टरनेट की दुनिया में कई ऐसी चीजें हैं जिनका भौतिक वजूद नहीं होता है। इन्टरनेट पर लोग जब क्रिकेट खेलते हैं तो वो वर्चुअल होता है। विडिओ गेम में कोई यूजर्स बड़ा मुक्केबाज भी बन सकता है लेकिन मुक्केबाजी का सारा हुनर कम्प्यूटर में कैद रहता है। इन्टरनेट ने दुनिया को बदल कर रख दिया है। धीरे-धीरे असली और आभासी दुनिया का अन्तर कम होता जा रहा है।

पैसों का डिजिटल लेन-देन तो पूरी दुनिया में काफी पहले से आम है लेकिन धीरे-धीरे हम डिजिटल करेंसी (Digital Currency) भी वजूद में आने लगी है। ये ऐसी करेंसी होती है जो भौतिक रूप (Physically) से मौजूद नहीं होती है लेकिन उस करेंसी का मूल्य होता है, इन्हें हम क्रिप्टोकरेन्सी (Cryptocurrency) के नाम से जानते हैं।

आज हम इस पोस्ट में बताएंगे कि क्रिप्टोकरेन्सी (Cryptocurrency) क्या है, क्रिप्टोकरेन्सी कैसे बनती है, इसकी शुरुआत कैसे हुई, इसके फायदे और नुकसान क्या है, ये कितने प्रकार का होता है ? तो आइये जानते हैं क्रिप्टोकरेन्सी के बारे में।

क्रिप्टोकरेन्सी क्या होता है ? What is Cryptocurrency in Hindi?

आजकल जब हम पैसों की बात करते हैं तो हमेशा हम ऐसी करेन्सी की बात करते हैं जो गवर्नमेंट ने बनाई है और गवर्नमेंट ही कन्ट्रोल करती है। लेकिन क्रिप्टोकरेन्सी एक डिजिटल करेन्सी होती है।

क्रिप्टोकरेन्सी दो शब्दों से मिलकर बना है- क्रिप्टो और करेन्सी (Crypto & Currency)

करेन्सी का मतलब तो हम सब जानते ही है और क्रिप्टोकरेन्सी का मतलब क्रिप्टोलोजी पर आधारित यानि कि कम्प्यूटर पर एलगेरिथ्म से बनाई गई करेन्सी को क्रिप्टोकरेन्सी कहते हैं।

 

जब हम डिजिटल करेन्सी नेटबैंकिंग या कैशलेस ट्रान्जेक्शन की बात करते हैं जो बैकग्राउंड में जो पैसा होता है वो वही पैसा, रुपया, या यूरो होता है, उसको हम डिजिटल स्टोर करते हैं ना कि कागज पर। यह डिजिटल लेन -देन जिस रूप में होता है उसे ही क्रिप्टोकरेन्सी कहते हैं।

क्रिप्टोकरेन्सी कैसे बनती है ?

कुछ साल पहले जब बिटकॉइन (Bitcoin) शुरू हुआ था, तब दुनिया में एक करोड़ डालर की ट्रान्जेक्शन होती थी तो उसमें एक डालर मात्र का भी बिटकॉइन नहीं होता था। आज हम देखते हैं कि जो एक हफ्ते में टोटल ट्रान्जेक्शन (Transaction) हो रही है, इसमें Currency speculation ट्रान्जेक्शन को जोड़ के लगभग एक ट्रिलियन डालर का हो रहा है।

इसके कान्टेक्स में अगर Globalization की सारी Currencies को देखे तो वो लगभग 70 ट्रिलियन डालर की एक हफ्ते में हो जाती है।

यदि दुनिया के जो टाप देश है जैसे- अमेरिका, इंग्लैंड, चीन, जापान आदि इनकी करेन्सी को हटा दिया जाए तो बिटकॉइन 1900 देशों की करेन्सी से ज्यादा पावरफुल है। बिटकॉइन एक डालर से कम पर शुरू हुआ और आज 900 डालर का एक बिटकॉइन है। और इससे अधिक भी हो सकता है।

दुनिया में जब कभी ऐसे इवेंट्स या घटनाएं हो जाती हैं जिसमें लोग असुरक्षित महसूस करते हैं जैसे कि USA में जब डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति बने तो कुछ लोगों को इनसिक्योरिटी हुई। भारत में भी जब नरेन्द्र मोदी जी ने कुछ नोटों को बन्द करवा दिए थे तब भी कुछ लोगों को इनसिक्योरिटी हुई। तो उस समय बिटकॉइन की कीमत हमेशा बढ़ती है, क्योंकि वहां पर कोई भी सरकार इसको कन्ट्रोल नहीं कर सकती है।

क्रिप्टोकरेन्सी का शुरुआत कैसे हुई ?

पुराने जमाने में जब बैंक नहीं हुआ करते थे तब व्यापारी, साहूकार हुण्डी या टोकन का इस्तेमाल करते थे। दरअसल टोकन एक तरह का आज्ञापत्र होता था जिसे दिखाकर या देकर सामान खरीदा या बेचा जाता जा सकता था। ये एक तरह का कागज का टुकड़ा होता था। इसे किसी दूसरे को भी दिया जा सकता था या इसे भविष्य की जरुरतों को देखते हुए अपने पास भी रखा जा सकता था।

 

बैंकों के आने के बाद भी समाज में लेन-देन के लिए इस तरह का लेन-देन चलता रहा। लेकिन 1980 के दशक में पहली बार कागज के टुकड़े के जगह डिजिटल करेंसी का प्रयोग का विचार शुरू हुआ। तब डेविड चाम ने सबसे पहले इन्टरनेट करेन्सी ‘Digi Cash’ की शुरुआत की।

इस बेहद और दिलचस्प तकनीक से उस समय मीडिया और लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। तब माइक्रोसॉफ्ट कम्पनी ने दुनिया के हर Windows  कम्प्यूटर पर Digi Cash डालने के लिए डेविड चाम की कम्पनी को 180 मिलियन डॉलर की पेशकश की थी। इसके बाद दुनिया के कई देशों के स्टार्ट-अप कम्पनियों ने रुपयों की लेन-देन के लिए डिजिटल लेन-देन की शुरुआत किया।

दरअसल व्यापारियों और कारोबारियों को यह तरीका पसंद आया क्योंकि इसमें पैसों का लेन-देन जल्दी और बिना रुकावट के होता था।

1990 के अंतिम दशक में अमेरिका के कम्पनी Paypal ने पीयर टू पीयर मनी ट्रांसफर की शुरुआत की। करीब 10 साल पहले जनवरी 2009 में क्रिप्टोकरेन्सी बिटकॉइन की शुरुआत हुई। सतोशी नकामोतो को माना जाता है बिटकॉइन का अविष्कारक।

अक्टूबर 2008 में नकामोतो ने एक बिटकॉइन: ए पीयर टू पीयर इलेक्ट्रॉनिक कैश सिस्टम के नाम से पर्चा छापा जिसमें क्रिप्टोग्राफी मेल इंग्लिश थी इसमें बिटकॉइन नाम के डिजिटल करेन्सी के खूबियों के बारे में बताया। उसके बाद तीन महीने बाद 3 जनवरी 2009 को क्रिप्टोकरेन्सी का प्रचलन शुरू हो गया।

क्रिप्टोकरेन्सी के क्या फायदे हैं ? Advantages of Cryptocurrency:

दुनिया के हर देश की सरकार आज कैशलेस ट्रान्जेक्शन (Cashless Transaction) या डिजिटल इकोनॉमी की बात कर रही है तो डिजीटलाईजेशन के सन्दर्भ में क्रिप्टोकरेन्सी सियाट करेन्सी जैसे-रुपया, डालर आदि के तुलना में फायदे ही हैं।

1.क्रिप्टोकरेन्सी पूरी तरह से सुरक्षित है।यह एक ब्लाकचैन (Blockchain) बेस्ड है। किसी तरह का भी ट्रान्जेक्शन करने के लिए पूरे ब्लाकचैन को माइन्ड करना पड़ता है इसलिए क्रिप्टोकरेन्सी पूरी तरह से Secure है।

2.क्रिप्टोकरेन्सी किसी एक व्यक्ति या एक देश या एक कमेटी के कन्ट्रोल में नहीं होती है तो यह बहुत ही फायदेमंद है क्योंकि नोटबन्दी या करेन्सी का मूल्य घटने जैसे खतरा नहीं रहता है।

क्रिप्टोकरेन्सी के क्या नुकसान हैं ? Disadvantages of Cryptocurrency ?

1.क्रिप्टोकरेन्सी एक Completely डिजिटल करेन्सी है। इसका फिजिकल वर्जन नहीं होता है।

2.क्रिप्टोकरेन्सी के ना तो नोट छापे जा सकते हैं और ना तो इसका कोई बैंक अकाउंट या पासबुक बन सकता है।

3.वे लोग जिनके पास डिजिटल टेक्नोलॉजी नहीं है या जिनके वहाँ इलेक्ट्रॉसिटी या बिजली नहीं है,वे किसी तरह कि डिजिटल डिवाइस चला नहीं सकते वे लोग क्रिप्टोकरेन्सी के दायरे से आज बाहर हैं।

क्रिप्टोकरेन्सी कितने प्रकार की होते है ? Types of Crypto Currency :

क्रिप्टोकरेन्सी कई प्रकार की होते हैं जैसे- बिटकॉइन, इथेरियम, रिप्पल, लिटकाइन, डैश, निओ, मोनेरो, स्ट्रे टिस, जैडकैश आदि।बिटकॉइन सबसे पापुलर क्रिप्टोकरेन्सी हैं।आज से 4-5 साल पहले बिटकॉइन अकेला 95-96% शेयर होल्ड करता था।

आज बिटकॉइन का मार्केट शेयर 66% है। इन क्रिप्टोकरेन्सी को छोड़ कर अन्य करेन्सी भी है जो कि स्पेशलाइज्ड करेंसी होती है जैसे कि रेडक्वान,लोगों को जब टिप्स देने होते हैं जैसे कि आप फेसबुक पर अच्छी एन्ट्री की और किसी को पसंद आई और वह उसे थोड़े से पैसा देना चाहे तो उसके लिए रेडक्वान यूज होता है।

सभी लोग करेन्सी बना सकते हैं लेकिन उनका कोई मायने नहीं है क्योंकि उनका कोई यूज नहीं है। बिटकॉइन ही सबसे पापुलर क्रिप्टोकरेन्सी है। दुनिया में बिटकॉइन के जरिए ही लेन-देन हो रहा है क्योंकि बिटकॉइन सबसे सुरक्षित क्रिप्टोकरेन्सी है। बिटकॉइन पहली Decentralized डिजिटल करेन्सी है।

Bitcoin

बिटकॉइन का मोबाइल और डीटीएच सर्विस की रिचार्ज करने वाली कम्पनियाँ, आनलाइन शापिंग, गिफ्ट कार्ड आदि में इस्तेमाल हो रहा है।

भारत में तकरीबन 20 ऐसी बिटकॉइन कम्पनियां कारोबार कर रही हैं जिनमें से तीन को वेन्चुएल फन्डींग मिली है।आने वाले समय में जैसे- जैसे इस करेंसी का इस्तेमाल बढ़ेगा, कारोबार के मौके भी बढ़ेंगे।

क्रिप्टोकरेन्सी के रूप में बिटकॉइन को एक यूनिवर्सल करेन्सी माना जा रहा है। भले ही दुनिया भर के सेन्ट्रल बैंक बिटकॉइन को कानूनी रूप से मान्यता देने में वक्त ले रहे हों। इसके बावजूद बिटकॉइन एक ग्लोबल करेन्सी बन चुकी है और अब वह दिन भी दूर नहीं जब क्रिप्टोकरेन्सी भी सरकारी मान्यताओं के दायरे में आकर अपनी पापुलैरिटी को दोगुना करने में कामयाब होंगी।

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