क्लाउड कम्प्यूटिंग क्या है? इसके लाभ एवम् कमियाँ

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हेलो दोस्तों, हमारे ब्लॉग में आपका स्वागत है। आज हम इस पोस्ट में क्लाउड कम्प्यूटिंग Cloud Computing के बारे में बतायेगे। क्लाउड कम्प्यूटिंग क्या है?, क्लाउड कम्प्यूटिंग का इतिहास क्या है?, इसके लाभ तथा कमिया क्या है?, इसके प्रकार तथा इसके क्या सेवाए हैं?, तो आइये जानते हैं क्लाउड कम्प्यूटिंग के बारे में।

क्लाउड कंप्यूटिंग (cloud computing) क्या है ?

क्लाउड कम्प्यूटटिंग दो शब्दों से मिलकर बना है। क्लाउड का अर्थ बादल और कम्प्यूटटिंग का अर्थ गणना होता है। अगर देखा जाए तो क्लाउड कम्प्यूटटिंग एक इंटरनेट पर आधारित प्रक्रिया है। जिसमें कम्प्यूटर और अन्य डिवाइस के लिए डिमांड पर डेटा और रिसोर्सेज शेयर किये जाते हैं।

दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि क्लाउड कम्प्यूटटिंग का उपयोग आप की फाइलों को फिजिकल सर्वर पर स्टोर किया जाता हैं जिसमें क्लाउड कम्प्यूटटिंग प्रोवाइडर द्वारा मेन्टेन और कन्ट्रोल किया जाता है। क्लाउड स्टोरेज में आपको आपके खुद के हार्ड ड्राइव पर इन्फोर्मेशन स्टोर करने की जरूरत नहीं होती है। यह क्लाउड स्टोर पर स्टोर होती है और आप इसे किसी भी लोकेशन से प्राप्त कर सकते हैं तथा लेपटॉप, टेबलेट या स्मार्ट फोन जैसे अपनी पसन्द के किसी भी डिवाइस द्वारा डाउनलोड कर सकते हैं।

क्लाउड कम्प्यूटटिंग का उपयोग एक नवीनतम प्रकार की वेब होस्टिग सेवा क्लाउड होस्टिंग प्रस्तुत की गई है। इसके साथ गूगल गियर जैसे-अनुक्रमो के जरिये आपको इस तरह की बहुत सारी सेवाए आफलाइन भी मिली करेगी।

क्लाउड कम्प्यूटिंग के कुछ उदाहरण- 

  • यूट्यूब क्लाउड कम्प्यूटटिंग का एक बेहतर उदाहरण है। यह एक क्लाउड स्टोरेज के माध्यम से करोड़ों यूजर्स के वीडियो फाइलों को होस्ट करने का कार्य करता है।
  • इसी प्रकार Picasa और Flickr जो क्रक करोड़ों उपयोगकर्ताओ के डिजिटल फोटोग्राफ को होस्ट अपने सर्वर के माध्यम से करता है
  • Google Docs भी एक क्लाउड कम्प्यूटटिंग का बेहतरीन उदाहरण है जो अपने उपयोगकर्ता वर्डाडक्यूमेंट, स्प्रेडशीट,प्रजेन्टेशन इत्यादि फाइलों के डेटा को सर्वर में अपलोड करने की सुविधा प्रदान करता है। इसके साथ-साथ उन दस्तावेजों में बदलाव और प्रकाशन करने का विकल्प भी देता है।
  • फेसबुक भी एक क्लाउड कम्प्यूटटिंग का एक उदाहरण है जिसमें लाखों उपयोगकर्ता प्रतिदिन कितने विलियन फोटो अपलोड करते हैं।

क्लाउड कम्प्यूटिग (Cloud computing) का इतिहास-

क्लाउड कम्प्यूटटिंग की अवधारणा सन् 1960 में अस्तित्व में आयी थी। जब जान मेक केर्थी ने अपनी राय दी कि कम्प्यूटेशन को किस दिन सार्वजनिक उपयोगगता के रूप में संगठित  किया जा सकता है। सन् 1990 के दशक में यह डेटा सर्किटमें शामिल था जो गर्तव्य स्थानों के बीच सख्त तारो से युक्त थे।

बाद में टेली कॉम कंपंनीयों ने डेटा सिंचार के लिए VPN (Virtual private network) सेवा की पेशकश करना शुरू किया। 1990 के दशक के प्रारम्भ में ही क्लाउड शब्द व्यवसायिक उपयोग में आया था। इसका उपयोग अतुल्यकालिक अंतरण विधा (ATM) नेटवर्क का उल्लेख करने के लिए किया जाता था।

सन् 1995 में कई दूर संचार कम्पनी सहयोगियों की सहायता से एक कम आयु का क्लाउड कम्प्यूटटिंग उत्पाद शुरू किया। इसमें उपभोक्ता उन्मुख इटरनेट के लोकप्रिय होने के ठीक पहले शुरू किया गया। 1999 में Sales force.com की स्थापना मार्क बेनिओक पारकर हेरिस और उनके सहयोगगयों के द्वारा की गई। उन्होंने गूगल और याहू जैसे कई कंपनियों के द्वारा कई तकनीकों को व्यवसायिक प्रयोगों पर लागू किया और सफलग्राहकों के साथ Saas और मााँग की अवधारणा भी प्रदान की।

सन् 2000 के दशक के शुरुआत में माइक्रोसॉफ्ट ने वेब सेवाओ के विकास के माध्यम से Saas की अवधारणा को विस्तृत किया फिर IBM ने 2001 में आटोमेटिक कम्प्यूटटिंग घोषणा पत्र में इनका विवरण दिया जिसमें सर्वर , अनुप्रयोग, नेटवर्क, सुरक्षा तंत्र और ऐसे अनेक तत्वों के साथ जटिल आइटी (Information technology) प्रणाली के प्रबधन में उन्नत आटोमेशन तकनीकी जैसे -स्व नियत्रण, स्व चिकित्सा, स्व विन्यास और स्व अनुकूलन का वर्णन किया जिन्हें एक उद्यम में अमासीकृत किया जा सकता है।

इसमें Amazon ने 2005 में वेब सेवाओ के माध्यम से अपने सिस्टम उपलब्ध कराए। सन् 2007 में Google व IBM द्वारा विश्वविद्यालयों मे क्लाउड कम्प्यूटटिंग अनुसिंधान परियोजना शुरू की।

सन् 2008 में क्लाउड कम्प्यूटटिंग की दिशा में नियोजित स्थानातरण के परिणामस्वरूप कुछ क्षेत्रों इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी उत्पादों में बहुत वृद्धि हुई तथा अन्य क्षेत्रों में कमी आयी।

क्लाउड कम्प्यूटिंग ( Cloud computing) के लाभ –

  • क्लाउड कम्प्यूटटिंग में सभी फाइलों का आनलाइन तथा आफलाइन बैकअप रहता है।
  • फाइल को किसी भी स्थान पर खोल के कार्य किया जा सकता है।
  • क्लाउड कम्प्यूटटिंग की फाइलों को कई स्थानों पर शेयर किया जा सकता है।
  • कम्प्यूटर डिवाइस के खराब होने पर किसी दूसरे कम्प्यूटर डिवाइस में फाइल को आसानी से बैकअप बनाया जा सकता है।
  • इसमें फाइलों को एक साथ मोबाइल ,कम्प्यूटर, लेपटॉप, टेबलेट इत्यादि से प्प्राप्त किया जा सकता है और इस सुविधा का लाभ आप मुफ्त में उठा सकते हैं। इसके लिए आपको कोई अतिरिक्त हार्डवेयर की आवश्यकता नही पड़ती है।
  • क्लाउड कम्प्यूटटिंग फाइलों को प्रयोग में लाना बहुत ह आसान है। यह कम्प्यूटर या विंडोज एक्स्लोरर की तरह दिखाई देता है।
  • क्लाउड कम्प्यूटटिंग में फाइल को आनलाइन एडिट या परिवर्तन की  सुविधा होती है।
  • इसमें बहुत ह ववस्तृत पैमाने पर डेटा भण्डारण की सुववधा होती है ,जैसे- 25 गीगाबाइट तक।
  • इसमें सबसे बड़ी सुविधा यह है कि इसमें किसी साइज की फाइलों को आनलाइन शेयर  जा किया सकता है। इसमें ई-मेल की तरह 10 मेगाबाइट का बन्धन नही है।

 

क्लाउड कम्प्यूटिंग(Cloud computing) का प्रयोग-

क्लाउड कम्प्यूटटिंग का प्रयोग करने के लिए आपको केवल क्लाउड भण्डारण सेवा उपलब्ध कराने वाल वेबसाइट पर केवल खाता बनाना होगा और बस आप कुछ ह मिनटों में क्लाउड भण्डारण सेवा का लाभ उठा सकते हैं। क्लाउड भण्डारण देने वाल कुछ प्रमुख वेबसाइटों के नाम – Google drive, Microsoft,Sky Drive, Handed.disk claudsrvis, 4sync,drop box इत्यादि वेबसाइट है जो क्लाउड कम्प्यूटटिंग भण्डारण सेवा की सुविधा देती है।

क्लाउड कम्प्यूटिंग(Cloud computing) की कमिया

  • क्लाउड कम्प्यूटटिंग उपयोगकर्ता को अपने डाटा के भौतिक भण्डारण की अनुमति नही होती है।
  • यह डाटा संग्रहण और नियिंत्रण की जिम्मेदारी प्रदाता के हाथों में नही देता है।
  • जहाँ इटरनेट की सुवधा नही है, वहाँ क्लाउड सर्विस की सुविधा का लाभ नही ले सकते हैं।
  • क्लाउड कम्प्यूटटिंग उपयोगकर्ता की स्वतंत्रता को सिमित कर देता है।
  • इसमें उपयोगकर्ता को नये प्रयोगों को इन्सटाल करने की स्वतंत्रता नही होती है और विशिष्ट कार्य करने के लिए प्रशासकों की आवश्यकता होती है।
  • इसमें उपयोगकर्ता के व्यक्तिगत डेटा की गोपनीयता का खतरा रहता है।
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क्लाउड कम्प्यूटिंग(Cloud computing) के प्रकार –

1.सार्वजनिक क्लाउड कम्प्यूटिंग –

सार्वजनिक क्लाउड कम्प्यूटटिंग में संसाधन इटरनेट पर स्व-सेवा आधारित एक फाइन ग्रेण्ड पर गतिक रूप से स्थापित होते है। ये वेब सेवाओ के माध्यम से एक आफ साइट तीसरे प्रदाता पर कार्य करते हैं।

2.संकरित क्लाउड कम्प्यूटिंग –

एक संकरित क्लाउड कम्प्यूटिंग पर्यावरण में बाहुल्य में आंतरिक या बाह्य प्रदाता शामिल होते हैं जो अधिकांश उद्यमों के लिए प्रासंगिक होता है।

3.प्राइवेट क्लाउड कम्प्यूटिंग

जब क्लाउड कम्प्यूटिंग निजी नेटवर्क पर कार्य करता है। तब निजी क्लाउड कम्प्यूटिंग के उदाहरण IT (इन्फोर्मेशन  टेक्नोलॉजी) कारपोरेट सेक्टर में देखे जाते हैं।

 

क्लाउड कम्प्यूटिंग सेवा-

क्लाउड कम्प्यूटिंग सेवा को तीन हिस्सों मे विभाजित किया जा सकता है-

1- Infrastructure as a service (IaaS)-

यह सेवा स्व सेवा के माडल पर आधारित होती है। जिसके द्वारा देखने, प्राप्त करने और इन्फ्रास्ट्रक्चर का प्रबंधन करने के लिए प्रयोग किया जाता है। यह प्रक्रिया सुदूर स्थान से भी सम्पन्न होती है। एक बिजनेस यूजर के रूप आप सूचना सेवा के लिए अनुरोध कर सकते हैं और आप केवल उसी सर्विस  का भुगतान कर सकते है जन्हें आप केवल प्रयोग में लाते हैं। उदाहरण-सर्वर  ,फायरवॉल, राउटर  ,सी.डी.एन इत्यादि।

2.Platform as a Service (Paas) –

यह क्लाउड कम्प्यूटिंग का बेसिक एनवायरनमेंट है, जिसके द्वारा आपके एप्लीकेशन को विकसित करने, परीक्षण करने, रन और प्रबंधन करने के लिए प्रयोग करते हैं। इसके वेब  सर्वर  ,एजक्सक्यूशन रन टाइम और आनलाइन डेटाबेस शामिल है। इसका  दृष्टिकोण बुनियादी  इन्फ्रास्ट्रक्चर  को खरिदने, निर्माण करने या उसके प्रबंधन करने वाली जटिलता के बिना आपकी जरूरत के अनुसार विकसित पर्यावरण देना है। जैसे कि आप ई- कामर्स के वेबसाइटों को विकसित करने में पेमेंट में व्यापार सर्वरों के प्रयोग में किया जाता  है।

3.Software as a Service (Saas)-

इसके प्रयोग में host server पर साफ्टवेयर का उपयोग शामिल है। इसमें वेब ब्राउजर के माध्यम से एप्लीकेशन रन करता है और आपके बिजनेस के बाहर स्टोर फाइलों को सेव करता है। इसका उपयोग छोटे व्यवसायों में किया जाता है। जैसे -E-mail और office software में।

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